इंद्रिय-निग्रह – भगवद गीता की शिक्षा

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मानव जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है – इंद्रियों पर नियंत्रण
श्रीकृष्ण ने गीता में अर्जुन को सिखाया कि जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में कर लेता है, वही वास्तव में स्थिर बुद्धि वाला और सफल जीवन जीने वाला होता है।
👉 इंद्रिय-निग्रह का अर्थ है मन, वाणी और शरीर को अनुशासन में रखना।


इंद्रिय-निग्रह का वास्तविक अर्थ

  • इंद्रिय-निग्रह का मतलब इंद्रियों को दबाना नहीं, बल्कि उनका सही दिशा में प्रयोग करना है।
  • स्वाद, स्पर्श, दृष्टि, श्रवण और गंध – ये पांच इंद्रियां अगर मनमानी करें, तो व्यक्ति मोह और दुख में फँस जाता है।
  • जब इन्हें नियंत्रित कर लिया जाए, तो व्यक्ति आत्म-ज्ञान और शांति प्राप्त करता है।

अर्जुन और इंद्रिय नियंत्रण

युद्धभूमि में अर्जुन की इंद्रियां और मन द्वंद्व में उलझे हुए थे।
श्रीकृष्ण ने उसे बताया कि सच्चा योद्धा वही है, जो पहले अपने मन और इंद्रियों पर विजय पा ले।

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गीता में इंद्रिय-निग्रह के महत्व पर उपदेश

  1. मन का शुद्धिकरण – इंद्रिय संयम से मन स्थिर और शांत होता है।
  2. आसक्ति का नाश – इंद्रियों को नियंत्रण में रखकर इच्छाओं पर काबू पाया जा सकता है।
  3. सच्ची स्वतंत्रता – जो अपनी इंद्रियों को वश में कर लेता है, वही वास्तव में स्वतंत्र होता है।
  4. योग और ध्यान की सफलता – बिना इंद्रिय-निग्रह के योग और ध्यान सफल नहीं हो सकते।

श्रीकृष्ण के श्लोक (अध्याय 2, श्लोक 58)

👉 “जैसे कछुआ अपने अंगों को भीतर समेट लेता है, वैसे ही जो मनुष्य अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है, वही स्थिर बुद्धि वाला कहलाता है।”


आधुनिक जीवन में इंद्रिय-निग्रह

आज के समय में मोबाइल, इंटरनेट, फास्ट-फूड, सोशल मीडिया और भोग-विलास हमारी इंद्रियों को लगातार आकर्षित करते हैं।

  • इंद्रिय-निग्रह हमें इनसे बचाकर संतुलित जीवन जीने में मदद करता है।
  • यह हमें अनुशासित, स्वस्थ और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
  • इससे हम अपने लक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।

प्रेरणादायक उदाहरण

  • महात्मा गांधी – उन्होंने संयम और आत्म-नियंत्रण से पूरे विश्व को प्रेरित किया।
  • योगी और संत – जिन्होंने कठोर साधना और इंद्रिय-निग्रह से आत्मिक उन्नति प्राप्त की।
  • अरjuna – जिसने कृष्ण के उपदेश से मन और इंद्रियों पर विजय पाई और धर्मयुद्ध किया।

इंद्रिय-निग्रह के अभ्यास

  1. ध्यान और प्राणायाम – मन और श्वास पर नियंत्रण से इंद्रियां संयमित होती हैं।
  2. सत्संग और अध्ययन – अच्छे विचार इंद्रियों को सही दिशा देते हैं।
  3. सात्त्विक आहार – शुद्ध भोजन इंद्रियों को शांत रखता है।
  4. संयमित दिनचर्या – नियमित जीवनशैली इंद्रिय-निग्रह का आधार है।

निष्कर्ष (Conclusion)

भगवद गीता की आठवीं शिक्षा “इंद्रिय-निग्रह” हमें बताती है कि जीवन में सफलता, शांति और मुक्ति पाने के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण आवश्यक है।
👉 इंद्रिय-निग्रह से ही व्यक्ति स्थिर, धैर्यवान और आत्म-नियंत्रित बनता है।

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श्रीकृष्ण का संदेश:
“जो इंद्रियों को वश में कर लेता है, वही सच्चा योगी और ज्ञानी है।”

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