हमारे टेलीग्राम चैनल से जुड़ें
Join Now
भगवद गीता महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। इसमें मुख्यतः कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि पर अर्जुन और श्रीकृष्ण के बीच संवाद है। लेकिन गीता के संदर्भ में और भी कुछ महत्वपूर्ण पात्र जुड़े हुए हैं।
Contents
यहाँ मुख्य पात्रों की सूची (Main Character List of Bhagavad Gita) दी जा रही है:
1. श्रीकृष्ण
- गीता के उपदेशक और अर्जुन के सारथी।
- भगवान विष्णु के अवतार, जिन्होंने धर्म और कर्म का ज्ञान दिया।
- गीता का सार – कर्मयोग, भक्ति, ज्ञान और अनासक्ति – उन्हीं ने समझाया।
2. अर्जुन
- पांडवों में तीसरे भाई और महाभारत युद्ध के महान धनुर्धर।
- गीता के श्रोता।
- युद्ध के आरंभ में मोह, करुणा और आसक्ति के कारण शस्त्र त्याग दिए।
- श्रीकृष्ण के उपदेश से पुनः अपने धर्म (क्षत्रिय धर्म) का पालन किया।
3. धृतराष्ट्र
- कौरवों के अंधे पिता और हस्तिनापुर के राजा।
- युद्धभूमि को नहीं देख सकते थे, इसलिए उन्होंने अपने मंत्री संजय से घटनाओं का वर्णन सुना।
4. संजय
- धृतराष्ट्र के सारथी और सलाहकार।
- उन्हें महर्षि व्यास ने दिव्य दृष्टि दी थी।
- पूरे युद्ध और गीता संवाद का वर्णन धृतराष्ट्र को सुनाया।
5. भीष्म पितामह
- कौरव और पांडव दोनों के गुरु और रक्षक।
- कुरुक्षेत्र युद्ध में कौरवों की ओर से सेनापति।
- गीता संवाद के दौरान प्रत्यक्ष युद्धभूमि में उपस्थित।
6. द्रोणाचार्य
- पांडव और कौरव दोनों के गुरु।
- महान योद्धा और कौरवों की सेना के प्रमुख सेनापति।
- गीता संवाद के समय वे भी युद्धभूमि में मौजूद थे।
7. दुर्योधन
- कौरवों का सबसे बड़ा भाई और पांडवों का शत्रु।
- युद्ध का मुख्य कारण – अहंकार, ईर्ष्या और राज्य की लालसा।
- गीता संवाद से पहले उसने भीष्म और द्रोण की शक्ति पर विश्वास जताया।
8. युधिष्ठिर
- पांडवों में सबसे बड़े भाई।
- धर्मराज कहलाते हैं।
- युद्ध में धर्म और सत्य की रक्षा के लिए शामिल हुए।
9. भीम
- पांडवों में दूसरे भाई।
- बलशाली और युद्ध में गदा के महान योद्धा।
10. नकुल और सहदेव
- पांडवों के छोटे भाई।
- युद्धभूमि में अपने-अपने शस्त्रों से लड़े।
निष्कर्ष
👉 गीता का मूल संवाद केवल श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच है।
लेकिन इसकी पृष्ठभूमि और घटनाओं में धृतराष्ट्र, संजय, भीष्म, द्रोण, दुर्योधन और पांडव भाई भी महत्वपूर्ण पात्र हैं।


