भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ भगवद गीता है। इसमें धर्म, कर्म, भक्ति और ज्ञान का जो अमृत निहित है, वह सम्पूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक है। इस दिव्य ग्रंथ के उपदेशक स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हैं। उन्होंने अर्जुन को मोह और संशय से मुक्त कर जीवन का सबसे बड़ा सत्य समझाया – धर्म के लिए कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
श्रीकृष्ण केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जीवन के महान शिक्षक, राजनीतिज्ञ, मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक भी थे।
श्रीकृष्ण का परिचय
- जन्म: मथुरा की कारागार में, देवकी और वसुदेव के पुत्र।
- उद्देश्य: अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना।
- जीवन भूमिकाएँ: बालकृष्ण (माखनचोर), गोपाल, रणधीर, मित्र, दार्शनिक और जगतगुरु।
भगवद गीता में श्रीकृष्ण की भूमिका
कुरुक्षेत्र युद्ध के समय अर्जुन अपने ही परिजनों को सामने देखकर युद्ध करने से पीछे हट गए।
उन्हें मोह, करुणा और निराशा ने घेर लिया।
यही वह क्षण था जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया।
👉 श्रीकृष्ण ने समझाया कि –
- आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है।
- धर्म के लिए युद्ध करना क्षत्रिय का कर्तव्य है।
- कर्म करो, लेकिन फल की आसक्ति मत रखो।
- भक्ति और आत्मज्ञान से ही मुक्ति संभव है।
श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ (Bhagavad Gita Teachings by Krishna)
1. कर्मयोग
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
👉 मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए, परिणाम की चिंता किए बिना।
2. आत्मा की अमरता
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि आत्मा कभी नष्ट नहीं होती। केवल शरीर बदलता है।
3. भक्ति का मार्ग
सबसे श्रेष्ठ योग भक्ति योग है। जब मनुष्य अपने अहंकार को छोड़कर ईश्वर को समर्पित होता है, तभी वह परम शांति प्राप्त करता है।
4. समत्व योग
सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समान भाव रखना ही सच्चा योग है।
श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व
1. मित्रता के आदर्श
- अर्जुन के साथ उनकी मित्रता अनुपम है।
- सच्चा मित्र वही है जो संकट में मार्गदर्शन करे।
2. राजनीति और कूटनीति के गुरु
- महाभारत युद्ध से पहले उन्होंने शांति स्थापित करने का पूरा प्रयास किया।
- जब शांति असफल हुई, तब धर्म की रक्षा के लिए युद्ध का समर्थन किया।
3. सारथी और मार्गदर्शक
- अर्जुन के रथ के सारथी बने, यह दर्शाता है कि भगवान भी सेवक बनकर धर्म की रक्षा करते हैं।
- उन्होंने अर्जुन के मन से भ्रम और मोह को हटाकर उसे धर्म के मार्ग पर चलाया।
आधुनिक जीवन में श्रीकृष्ण की प्रासंगिकता
- कर्मयोग – आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में भी कर्मयोग सबसे महत्वपूर्ण है।
- भक्ति और आस्था – मन की शांति और संतुलन के लिए।
- प्रबंधन कौशल – कृष्ण का जीवन एक आदर्श मैनेजर और लीडर का उदाहरण है।
- संकट प्रबंधन – कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना कृष्ण से सीखा जा सकता है।
प्रेरणादायक उद्धरण (Quotes of Krishna from Gita)
- “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
- “योगस्थः कुरु कर्माणि।”
- “मां एकं शरणं व्रज।”
- “ज्ञानी भक्त ही मेरे लिए सबसे प्रिय है।”
निष्कर्ष
श्रीकृष्ण केवल महाभारत के नायक नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के शिक्षक हैं।
उनका दिया हुआ भगवद गीता का ज्ञान समय से परे है।
👉 हर युग में और हर इंसान के लिए यह शिक्षा प्रासंगिक है कि –
धर्म का पालन करो, निस्वार्थ कर्म करो और ईश्वर में पूर्ण विश्वास रखो।



