गणेश चतुर्थी 2025: सम्पूर्ण मार्गदर्शक – तिथि, पूजा विधि, महत्व और परंपरा

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श्री गणेशाय नमः
हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण और अत्यंत प्रचलित त्योहार है गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी या गणेशोत्सव भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान गणेश (विघ्नहर्ता, बुद्धि-प्रदाता और प्रभु आरंभों के) के जन्मोत्सव के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जिसे बड़े धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश जी के जन्म का प्रतीक है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुखकर्ता-दुखहर्ता कहा जाता है। उनकी पूजा से जीवन में आने वाली सभी बाधाएँ दूर होती हैं और ज्ञान, बुद्धि तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।

2025 में गणेश चतुर्थी शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन घर-घर में गणपति की स्थापना होगी, पंडालों में भव्य आयोजन होंगे और 10 दिन तक भक्तिपूर्ण वातावरण रहेगा।

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August 23, 2025

📅 गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • गणेश चतुर्थी तिथि आरंभ: 29 अगस्त 2025, प्रातः 03:07 बजे
  • गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त: 30 अगस्त 2025, प्रातः 01:19 बजे
  • गणेश पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (मध्याह्न काल): 29 अगस्त 2025, प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक

शास्त्रीय मुहूर्त के अनुसार, मध्याह्न पूजा का सबसे शुभ समय:

  • भारत में लगभग 11:05 AM – 1:40 PM के बीच माना गया है ।
  • मशहूर डिक पञ्चांग के अनुसार, यह अवधि 11:06 AM – 1:40 PM है

👉 मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा करना सबसे शुभ माना गया है।


🙏 गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

  • नए कार्य की शुरुआत: किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति पूजन का महत्व है।
  • ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: विद्यार्थी और विद्वान गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  • एकता और भाईचारा: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजों के समय इसे सार्वजनिक उत्सव के रूप में शुरू किया था, जिससे समाज एकजुट हुआ।
  • संस्कार और संस्कृति: इस पर्व के माध्यम से भारतीय कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं का प्रदर्शन होता है।

🕉️ गणेश चतुर्थी की पूजा विधि

1. गणेश स्थापना

  • घर या पंडाल में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है।
  • स्थापना से पहले कलश पूजन और प्राण प्रतिष्ठा की जाती है।

2. दैनिक पूजा और अर्चना

  • गणेश जी को मोदक, लड्डू, दूर्वा घास, लाल फूल और नारियल चढ़ाया जाता है।
  • भक्त “सुखकर्ता दुखहर्ता” आरती और गणपति स्तोत्र का पाठ करते हैं।
  • 10 दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा होती है।

3. गणेश विसर्जन

  • दसवें दिन अनंत चतुर्दशी को गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
  • विसर्जन जीवन के चक्र – सृजन और विनाश – का प्रतीक है।

🎉 भारत में गणेश चतुर्थी का उत्सव

महाराष्ट्र

  • मुंबई और पुणे में सबसे भव्य उत्सव मनाया जाता है।
  • लालबागचा राजा और सिद्धिविनायक गणपति सबसे प्रसिद्ध पंडाल हैं।

कर्नाटक और आंध्र प्रदेश

  • घरों को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम और नृत्य-गान आयोजित होते हैं।

उत्तर भारत

  • मंदिरों में गणेश पूजन और भजन संध्या का आयोजन होता है।

विदेशों में

  • अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस में भी भारतीय समुदाय बड़े उत्साह से गणेश चतुर्थी मनाता है।

🍬 गणेश चतुर्थी के विशेष भोग

  • मोदक: गणेश जी का प्रिय पकवान, चावल के आटे, गुड़ और नारियल से बनता है।
  • लड्डू: खासकर बेसन और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।
  • पुरण पोली: गुड़ और दाल से भरी मीठी रोटी।
  • करंजी/गुजिया: नारियल या मावे से भरा मीठा व्यंजन।

📖 गणेश चतुर्थी से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

1. गणेश जी का जन्म

पार्वती जी ने स्नान के समय शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की। जब शिवजी अंदर आना चाहते थे तो गणेश जी ने रोका, जिससे क्रोधित होकर शिवजी ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया गया।

2. चंद्रमा का शाप

एक बार गणेश जी ने चंद्रमा को अहंकार के कारण शाप दिया कि गणेश चतुर्थी के दिन जो भी चंद्रमा को देखेगा उसे अपयश मिलेगा।

3. मोदक की कथा

देवताओं ने गणेश जी को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक मोदक प्रदान किया। तभी से मोदक उनका प्रिय भोग माना जाता है।


🌍 पर्यावरण-हितैषी गणेश चतुर्थी

आजकल लोग पर्यावरण की रक्षा के लिए इको-फ्रेंडली तरीके से गणेश चतुर्थी मनाते हैं।

  • पीओपी (Plaster of Paris) मूर्तियों के स्थान पर मिट्टी की मूर्तियाँ।
  • कृत्रिम तालाबों में विसर्जन।
  • प्लास्टिक सजावट के बजाय फूल, पत्तियाँ और रंगोली।

🧘 गणपति की मूर्ति से जीवन के संदेश

  • बड़ा सिर – बड़ा सोचो।
  • बड़े कान – सबकी सुनो।
  • छोटी आँखें – एकाग्र रहो।
  • टूटी हुई सूंड – त्याग का प्रतीक।
  • बड़ा पेट – हर परिस्थिति को धैर्य से स्वीकार करो।

📌 निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी 2025 (29 अगस्त 2025) का पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। चाहे आप घर पर छोटे रूप में मनाएँ या पंडालों में भव्य रूप से, असली संदेश यही है कि भगवान गणेश के आशीर्वाद से जीवन की बाधाएँ दूर हों और नया उत्साह व ऊर्जा प्राप्त हो।

गणेश चतुर्थी 2025 का सारांश तालिका

विषयविवरण
मूल तिथि27 अगस्त 2025 (चतुर्थी तिथि: 26 अगस्त 1:54 PM से – 27 अगस्त 3:44 PM)
पूजा मुहूर्तलगभग 11:05 AM – 1:40 PM
विसर्जन6 सितंबर 2025 (शनिवार)
महत्वबुद्धि, मंगल, आरंभ, एकता का प्रतीक
इतिहासशिवाजी द्वारा आरंभ, तिलक द्वारा सार्वजनिक रूप में स्थापित
प्रमुख स्थललालबाग (मुंबई), खैरताबाद (हैदराबाद), महिदरपुरा (सूरत)
आरती“सुखकर्ता दुखहर्ता”
अंतर्राष्ट्रीय उत्सवअमेरिका, कनाडा एवं अन्य जगहों में धूमधाम से मनाया जाता है

गणेश चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं—यह भारतीय संस्कृति की एक संपूर्ण कल्पना है: जहाँ भक्तिभाव, कला, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक आनंद सब एक साथ मिलते हैं। यह उत्सव हमें वigna नाशक भगवान गणेश के दिव्य आशीर्वाद से जोड़ता है और नए आरंभों के लिए उत्साह जगाता है।


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