तीन गुण (सत्व, रज, तम) – भगवद गीता की शिक्षा

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मानव स्वभाव और उसका आचरण तीन प्रमुख गुणों से प्रभावित होता है।
भगवद गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि हर इंसान का जीवन सत्व, रज और तम – इन तीन गुणों पर आधारित है।
👉 यह गुण हमारे विचार, व्यवहार और निर्णयों को नियंत्रित करते हैं।


तीन गुणों का अर्थ

1. सत्त्व गुण (Purity / Goodness)

  • ज्ञान, शांति, संतोष और धर्मप्रियता का गुण।
  • सत्त्व गुणी व्यक्ति सत्य, प्रेम और करुणा से भरा होता है।
  • वह दूसरों की भलाई के लिए काम करता है और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है।

2. रजस गुण (Passion / Activity)

  • कर्म, इच्छा, महत्वाकांक्षा और भौतिक सुख का गुण।
  • रजस गुणी व्यक्ति मेहनती, सक्रिय और इच्छाओं से प्रेरित होता है।
  • लेकिन यह गुण उसे बेचैन और परिणाम की आसक्ति में उलझा देता है।

3. तमस गुण (Ignorance / Inertia)

  • अज्ञान, आलस्य, मोह और नकारात्मकता का गुण।
  • तमस गुणी व्यक्ति जीवन में न तो प्रगति करता है और न ही दूसरों को आगे बढ़ने देता है।
  • इसमें क्रोध, ईर्ष्या और भ्रम अधिक रहता है।

गीता का श्लोक (अध्याय 14, श्लोक 5)

👉 “सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः।
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्॥”
(हे अर्जुन! सत्त्व, रज और तम – ये तीन गुण प्रकृति से उत्पन्न होते हैं और ये ही अविनाशी आत्मा को शरीर से बाँधते हैं।)


गुणों का प्रभाव

  • सत्त्व – आत्मा को ऊपर उठाता है और ज्ञान की ओर ले जाता है।
  • रजस – कर्म और इच्छाओं में बाँध देता है।
  • तमस – आत्मा को नीचे खींचता है और अज्ञान में रखता है।

संतुलन का महत्व

गीता सिखाती है कि जीवन में केवल एक गुण को पूरी तरह अपनाना संभव नहीं है।
👉 मनुष्य को चाहिए कि वह रजस और तमस को नियंत्रित करे और सत्त्व की ओर बढ़े।
लेकिन अंततः सभी गुणों से ऊपर उठकर आत्मज्ञान और भक्ति की अवस्था ही सर्वोच्च है।

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आधुनिक जीवन में तीन गुण

  • सत्त्व – शिक्षा, सेवा, योग, ध्यान और सकारात्मकता।
  • रजस – व्यवसाय, राजनीति, सफलता की दौड़, धन और नाम की इच्छा।
  • तमस – आलस्य, टीवी/मोबाइल की लत, क्रोध और नकारात्मक सोच।

👉 संतुलन बनाकर सत्त्व की ओर बढ़ना ही गीता का मार्ग है।


प्रेरणादायक उदाहरण

  • सत्त्व – महात्मा गांधी (सत्य, अहिंसा और करुणा से भरा जीवन)।
  • रजस – सम्राट अशोक (शुरुआत में महत्वाकांक्षा और युद्ध, बाद में धर्म की ओर मुड़े)।
  • तमस – रावण (अत्यधिक अहंकार और मोह ने उसका पतन किया)।

गुणों पर नियंत्रण कैसे करें

  1. सत्व का विकास करें – सत्संग, ध्यान, स्वाध्याय, ईमानदारी।
  2. रजस को संतुलित करें – मेहनत करें लेकिन आसक्ति से बचें।
  3. तमस को कम करें – आलस्य और अज्ञान त्यागें, आत्मनियंत्रण अपनाएँ।

निष्कर्ष (Conclusion)

भगवद गीता की तेरहवीं शिक्षा “तीन गुण – सत्त्व, रज और तम” हमें यह समझाती है कि ये गुण ही मानव जीवन को चलाते हैं।
👉 जब इंसान इन तीनों गुणों के प्रभाव को पहचान लेता है और उनसे ऊपर उठकर आत्मज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलता है, तभी वह सच्ची मुक्ति प्राप्त करता है।

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